जयपुर में FMG इंटर्न्स का धरना 8वें दिन भी जारी: ‘इक्वालिटी’ और स्टाइपेंड की मांग को लेकर अड़े डॉक्टर; गहलोत, भाटी व डिप्टी CM का मिला समर्थन

जयपुर: राजस्थान के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) इंटर्न्स का धरना बुधवार को 8वें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की धूप और अनिश्चितता के बीच बैठे इन युवा डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई लिखित आदेश जारी नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
मुख्य मांग: IMG के समान अधिकार और स्टाइपेंड
प्रदर्शन कर रहे FMG इंटर्न्स का कहना है कि वे किसी तरह की खैरात नहीं, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- आईएमजी (IMG) के साथ समानता (Equality): भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स (IMG) की तर्ज पर ही FMG इंटर्न्स को भी इंटर्नशिप की प्रक्रिया, सीटों के आवंटन और नियमों में पूरी समानता का अधिकार दिया जाए।
- समान स्टाइपेंड का अधिकार: जिस प्रकार भारतीय मेडिकल कॉलेजों से पास आउट इंटर्न्स (IMGs) को इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड दिया जाता है, ठीक उसी तरह FMG इंटर्न्स को भी समान रूप से स्टाइपेंड का भुगतान किया जाए।
नेताओं का मिला समर्थन, आश्वासनों की झड़ी
धरने के आठवें दिन तक छात्रों ने राज्य के प्रमुख राजनीतिक चेहरों और जन प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को मजबूती से रखा है:
- उप मुख्यमंत्री से मुलाकात: प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपा, जिस पर उन्होंने मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ट्वीट: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर राज्य सरकार से FMG इंटर्न्स के मुद्दे को गंभीरता से लेने और इसका जल्द से जल्द न्यायसंगत समाधान निकालने की अपील की।
- विधायक रवींद्र सिंह भाटी का समर्थन: निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने युवा डॉक्टरों के समर्थन में आवाज उठाई और प्रशासन से इंटर्न्स को उनका हक देने की मांग की।
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को ज्ञापन: प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने भी इस विषय में सरकार के समक्ष बात रखकर सहयोग का भरोसा दिलाया है।
“आश्वासन बहुत मिले, अब लिखित में आदेश चाहिए”
तमाम बड़े नेताओं और अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद इंटर्न्स में इस बात को लेकर नाराजगी है कि 8 दिन बीत जाने के बाद भी DME या सरकार की ओर से कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।
धरनारत डॉक्टरों का कहना है, “हमें हर तरफ से मौखिक सहानुभूति और आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन कागजों पर कुछ नहीं बदला है।
जब तक DME कार्यालय हमारी समानता (Equality) और स्टाइपेंड की मुख्य मांगों को लेकर कोई लिखित आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं करता, तब तक हमारा यह शांतिपूर्ण धरना लगातार जारी रहेगा।
“विदेशों से एमबीबीएस (MBBS) पूरा कर लौटे इन डॉक्टरों का कहना है कि वे भी दिन-रात मरीजों की सेवा के लिए तत्पर हैं, ऐसे में उनके साथ हो रहे भेदभाव को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि बढ़ता राजनीतिक दबाव और 8 दिनों का संघर्ष सरकार को कब तक लिखित फैसला लेने पर मजबूर करता है।




