Rajasthan Medical Officer Vacancy 2026: युवा चिकित्सकों का बड़ा मुद्दा, FMG स्टाइपेंड और पदों की संख्या बढ़ाने की उठी मांग
जयपुर। राजस्थान की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक बड़ा मामला इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है। प्रदेश के युवा चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर अपनी दो प्रमुख समस्याओं को लेकर गहरा दर्द साझा किया है। इस मुलाकात के बाद से ही राज्य के मेडिकल गलियारों और युवाओं के बीच हलचल तेज हो गई है।
आइए जानते हैं कि युवा चिकित्सकों के वे दो कौन से सुलगते मुद्दे हैं जिन पर इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है:

1. FMG इंटर्न्स को स्टाइपेंड का मामला
पहला और सबसे गंभीर मुद्दा विदेश से मेडिकल डिग्री (MBBS) हासिल करके लौटने वाले FMG (Foreign Medical Graduates) इंटर्न्स का है। प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे ये युवा चिकित्सक बाकी इंटर्न्स की तरह ही अस्पतालों में मरीजों की दिन-रात सेवा कर रहे हैं।
इसके बावजूद इन्हें स्टाइपेंड से पूरी तरह वंचित रखा गया है, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश भी मौजूद हैं। युवा चिकित्सकों की मांग है कि सरकार को इस संवेदनशीलता को समझते हुए नियमानुसार तुरंत स्टाइपेंड सुनिश्चित करना चाहिए।
Rajasthan Medical Officer Vacancy 2026 में पद बढ़ाने की मांग
दूसरा बड़ा मुद्दा Rajasthan Medical Officer Vacancy 2026 में पदों की संख्या में बढ़ोतरी से जुड़ा है। युवा चिकित्सक इन पदों की संख्या को मौजूदा 600 से बढ़ाकर 2,000 करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी लंबे समय से चली आ रही है।
ऐसे में सीमित पदों पर भर्ती न सिर्फ योग्य और मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि आमजन को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। यदि सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए पदों की संख्या बढ़ाती है, तो इससे रोजगार और चिकित्सा व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल
जब युवा डॉक्टर जो दिन-रात अस्पताल में मरीजों की जान बचाने में जुटे रहते हैं, उन्हें अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। क्या सरकार इन युवा चिकित्सकों की इन जायज मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाएगी? इस पर प्रदेशभर के मेडिकल छात्रों और युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं।
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